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सेतगंगा – छत्तीसगढ़ का ऐतिहासिक और धार्मिक पर्यटन स्थल

सेतगंगा छत्तीसगढ़ के प्रमुख धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों में से एक है। दक्षिण कौशल की पावन धरती पर स्थित यह स्थान धर्म, संस्कृति, पर्यटन, कला और इतिहास के लिए विशेष पहचान रखता है। सेतगंगा का प्राचीन नाम “श्वेतगंगा” माना जाता है, जिसका अर्थ है – सफेद और निर्मल गंगा।

सेतगंगा का इतिहास

कई शताब्दियों पहले यहाँ एक पवित्र कुंड प्रकट हुआ था। इस कुंड का जल गंगा नदी की तरह शीतल, स्वच्छ और निर्मल था। तपस्वियों और साधुओं ने इसकी पवित्रता को देखकर इसे “श्वेतगंगा” नाम दिया। समय के साथ यही नाम बदलकर सेतगंगा कहलाने लगा।

जनश्रुति के अनुसार फणीनागवंशी राजा को स्वप्न में माँ गंगा ने दर्शन दिए और कहा कि वे उनके राज्य की पश्चिमी सीमा में प्रकट होकर प्रवाहित हो रही हैं। इसके बाद 10वीं–11वीं शताब्दी में राजा ने यहाँ पवित्र कुंड और भगवान श्रीराम-जानकी मंदिर का निर्माण करवाया।

धार्मिक महत्व

सेतगंगा धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहाँ स्थित श्रीराम-जानकी मंदिर श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है। इसके साथ ही गुरुघासीदासजी का मंदिर भी यहाँ प्रसिद्ध है, जहाँ प्रतिवर्ष भव्य जयंती समारोह आयोजित किया जाता है। दूर-दूर से श्रद्धालु यहाँ दर्शन और पूजा के लिए आते हैं।

पर्यटन और सांस्कृतिक पहचान

सेतगंगा केवल धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर भी है। प्राकृतिक सौंदर्य, प्राचीन मंदिर और पवित्र कुंड इसे पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बनाते हैं। छत्तीसगढ़ आने वाले पर्यटक इस स्थल की आध्यात्मिक शांति और ऐतिहासिक महत्व का अनुभव करते हैं।

कैसे पहुँचे सेतगंगा

सेतगंगा, मुंगेली जिले के अंतर्गत स्थित एक प्रसिद्ध धार्मिक ग्राम है। सड़क मार्ग से यहाँ आसानी से पहुँचा जा सकता है। आसपास के क्षेत्रों से नियमित परिवहन सुविधाएँ उपलब्ध हैं।

ट्रेन द्वारा कैसे पहुंचे

Bilaspur रेलवे स्टेशन से Mungeli लगभग 70 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। बिलासपुर स्टेशन पहुंचने के बाद मुंगेली तक सड़क मार्ग से आसानी से पहुँचा जा सकता है। रेलवे स्टेशन से नियमित बस, टैक्सी और निजी वाहन की सुविधा उपलब्ध रहती है, जिससे यात्री आराम से मुंगेली विकासखंड तक पहुँच सकते हैं।

सड़क मार्ग से  

मुंगेली जिला मुख्यालय से लगभग 16 किलोमीटर पश्चिम दिशा में स्थित यह स्थान सड़क मार्ग द्वारा आसानी से पहुँचा जा सकता है। यह स्थल टेसुआ नाला के समीप स्थित होने के कारण प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण के लिए भी जाना जाता है। यहाँ तक पहुँचने के लिए मुंगेली से नियमित सड़क सुविधा उपलब्ध है तथा निजी वाहन, ऑटो और बस के माध्यम से आसानी से यात्रा की जा सकती है।

निष्कर्ष

सेतगंगा छत्तीसगढ़ की धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का अनमोल प्रतीक है। श्वेतगंगा कुंड, श्रीराम-जानकी मंदिर और गुरुघासीदासजी मंदिर इस स्थान को विशेष पहचान प्रदान करते हैं। यदि आप आध्यात्मिक शांति, इतिहास और संस्कृति का अद्भुत संगम देखना चाहते हैं, तो सेतगंगा अवश्य घूमने जाएँ।


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